Posted by: chawlamahender | October 28, 2008

आसराम बापू के लडके नारायण सिंधी ने की TRUST में हेरा – फेरी ( CHEATING)

जैसा कि आप जानते हैं मैं आसाराम एकदम विशवासु व उसके लडके नारायण सिंधी का सबसे नजदीकी ( PA ) था। नारायण ने विरार (महा॰) मे एक आशरम बनाया और थोडे समय बाद एक TRUST बनाई और उसमें जो TRUST DEED बनी उस DEED के कुछ आखिरी पेजों पर मेरे फरजी SIGN कर दिए। TRUST का पुरा नाम व पता-संत नारायण सांई संसथान, गांव कुमभारपाडा , पो॰ चंदनसार ,विरार(EAST), तालूका वसई, जिला ठाणे-महा॰।
                                                                                             हुआ यूं कि पहले हम तीन  TRUSTEE थे १॰ नारायण सिंधी २॰ मैं यानि महेंदृ चावला ३॰ विवेक राजपुरोहित ।
                                       फिर सिंधी का विचार बदला और उसने तीन से छः TRUSTEE  बनाने का विचार किया और उसमें तीन नए आदमी और जोड दिए १॰ गणपत पाटिल २॰ रमेश पाटिल ३॰ बाबा हरिदास।
आब यंहा पर TRUST के कागजात बदले गए तो उन पर मुझसे SIGN करवा कर नारायण सिंधी ने खुद मेरे जाली  कर दिए और TRUST  को THANE चैरिटी कमीशनर (CHARITY COMMISSONER) के OFFICE में REGD. करवा दिया गया। REGD.NO 3511 / THANE .
                                      फरवरी 2005 में नारायण सिंधी ने सिंधी महाशिवराञी (MAHASHIVRATRI) मनाने के लिए विरार आशरम आया, मुझे तो साथ होना ही था। Program के बाद गांव पंचायत से जमीन लेने की बात चली तो वो TRUST DEED मेरे हाथ मे आई जिसे देखकर मै एकदम हैरान रह गया कि ये TRUST मे  तीन से छः कब हुए एंव  हू ब हू मेरे जाली SIGN किसने किए।
                                     दिन का लगभग ११-१२ का समय था मै फौरन नारायण के पास गया एंव सारी बात कही तो सिंधि एकदम लाल-पीला हो गया और फटाक से मुझे बहुत जोर से दो-तीन लाफे जड दिए। मै एकदम घबरा गया और नारायण एकदम गुसे गुसे मे बोला —–तेरी जुबान बहुत चलने लगी है, तू बहुत हवा मे उडने लगा है तू कौन होता है मुझसे कुछ पूछने वाला , मै TRUST का मालिक हू जिसके मरजी जाली  करू। तेरे भी किए तू मेरा कया बिगाड लेगा। जबान बंद रख वरना हमेशा के तेरी जबान बंद कर दूंगा। तूने ये बात किसी को कही आंजाम तेरे लिए ठीक नही होगा और लात-घुसों से मेरी बहुत पिटाई की और बोला यदि जान की सलामती चाहता है तो कोरे कागग पर SIGN कर वरना तू जीवित नही बचेगा और पांच कोरे कागज पर जबरन SIGN करवा लिए । फिर बोला यदि तूने बाहर किसी को भी ये बात बताई तो इन कागजो का कहीं भी, किसी भी तरह उपयोग कर सकता हूं। मै इन पर तेरा SUCIDE NOTE  भी लिख सकता हू और मुझे उसके कमरे से बाहर भगा दिया।
                                      इसके बाद हम ( मै, सिंधि, कृशणा, करण और नरेंदृ) बेंगलोर चले गए लेकिन मैने मन ही मन नारायन को छोडने का विचार बना लिया तथा AUG.2005 मे मैने नारायण को छोड दिया एंव मेरे घर आ गया।  
http://timesofindia.indiatimes.com/Cities/Mumbai/Asaram_Bapus_son_booked_for_forgery/articleshow/3382495.cms”><span 

http://www.mumbaimirror.com/net/mmpaper.aspx?page=article&amp;sectname=CITY&amp;sectid=2&amp;contentid=2008082020080820023728762bdf7f48f”><span  

                    आप सभी के जहन मे एक सवाल होगा कि महेंदृ चावला तीन साल तक चुप कयों रहा ? 
                                आपको मै पहले ही बता चुका हूं कि नारायण सिंधी ने मुझसे ५ कोरे कागज पर SIGN करवा लिए थे और उन कागजों का कहीं भी उपयोग करने धमकी भी दी थी।
                मै इतना डरा हुआ था कि जुबान खोलने की हिंमत नही कर पा रहा था। मेरे मन मे जो डर था उस डर को निकालने मे मुझे तीन साल लग गए। हमारा मानसिक रुप से इतना शोषण हो चुका था कि उसकी पूरती(RECOVERY) करने मे मुझे तीन साल का समय लग गया। जिस आदमी को मै भगवान मानता था उसका सचा चेहरा जब सामने आया और पाया कि यह भगवान नही वरन् शैतान है और हमारी शरधा का दुरुपयोग कर रहा है तो उस समय हमारे मन मे बहुत गहरा सदमा लगा तो उस सदमे से बाहर आने मे मुझे तीन साल लग गए


Responses

  1. aap bhi mandali me rahe ho


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